॥ श्रीहरिः ॥
रंगद्वारं समासाद्य तस्मिन् नागमवस्थितम्।
अपश्यत् कुवलयापीडं कृष्णोऽम्बष्ठप्रचोदितम्॥ २
raṃgadvāraṃ samāsādya tasmin nāgamavasthitam|
apaśyat kuvalayāpīḍaṃ kṛṣṇo'mbaṣṭhapracoditam|| 2
अर्थ
भगवान् श्रीकृष्णने रंग-भूमिके दरवाजेपर पहुँचकर देखा कि वहाँ महावतकी प्रेरणासे कुवलयापीड नामका हाथी खड़ा है॥ २॥
रंगद्वारं समासाद्य तस्मिन् नागमवस्थितम्।
अपश्यत् कुवलयापीडं कृष्णोऽम्बष्ठप्रचोदितम्॥ २
भगवान् श्रीकृष्णने रंग-भूमिके दरवाजेपर पहुँचकर देखा कि वहाँ महावतकी प्रेरणासे कुवलयापीड नामका हाथी खड़ा है॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.43.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 397) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/43/2/