श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.42.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 42 · अथ द्विचत्वारिंशोऽध्यायः

अन्यानि चेत्थंभूतानि स्वप्नजागरितानि च।

पश्यन् मरणसन्त्रस्तो निद्रां लेभे न चिन्तया॥ ३१

anyāni cetthaṃbhūtāni svapnajāgaritāni ca|

paśyan maraṇasantrasto nidrāṃ lebhe na cintayā|| 31

अर्थ

स्वप्न और जाग्रत्-अवस्थामें उसने इसी प्रकारके और भी बहुत-से अपशकुन देखे। उनके कारण उसे बड़ी चिन्ता हो गयी, वह मृत्युसे डर गया और उसे नींद न आयी॥ ३१॥

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