परीक्षित्! जब रात बीत गयी और सूर्यनारायण पूर्व समुद्रसे ऊपर उठे, तब राजा कंसने मल्ल-क्रीड़ा (दंगल)-का महोत्सव प्रारम्भ कराया॥ ३२॥
व्युष्टायां निशि कौरव्य सूर्ये चाद्भ्यः समुत्थिते।
कारयामास वै कंसो मल्लक्रीडामहोत्सवम्॥ ३२
परीक्षित्! जब रात बीत गयी और सूर्यनारायण पूर्व समुद्रसे ऊपर उठे, तब राजा कंसने मल्ल-क्रीड़ा (दंगल)-का महोत्सव प्रारम्भ कराया॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.42.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 396) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/42/32/