गान्दिनीनन्दन अक्रूरजीने यह कहकर रथ हाँक दिया और भगवान् श्रीकृष्ण तथा बलरामजीको लेकर दिन ढलते-ढलते वे मथुरापुरी जा पहुँचे॥ ६॥✎ 1672
इत्युक्त्वा चोदयामास स्यन्दनं गान्दिनीसुतः।
मथुरामनयद् रामं कृष्णं चैव दिनात्यये॥ ६
गान्दिनीनन्दन अक्रूरजीने यह कहकर रथ हाँक दिया और भगवान् श्रीकृष्ण तथा बलरामजीको लेकर दिन ढलते-ढलते वे मथुरापुरी जा पहुँचे॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 386) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/41/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#971 शब्दोंके बीचका स्थान: दिनात्यये॥६ → दिनात्यये॥ ६