केवल मनुष्य ही झूठ नहीं बोलते, विधाता भी झूठ बोलते हैं । उसीपर विश्वास करके मैंने अपनी बहिनके बच्चे मार डाले। ओह! मैं कितना पापी हूँ॥ १७॥
दैवमप्यनृतं वक्ति न मर्त्या एव केवलम्।
यद्विश्रम्भादहं पापः स्वसुर्निहतवाञ्छिशून्॥ १७
केवल मनुष्य ही झूठ नहीं बोलते, विधाता भी झूठ बोलते हैं । उसीपर विश्वास करके मैंने अपनी बहिनके बच्चे मार डाले। ओह! मैं कितना पापी हूँ॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.4.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 147) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/4/17/