तुम दोनों महात्मा हो। अपने पुत्रोंके लिये शोक मत करो। उन्हें तो अपने कर्मका ही फल मिला है। सभी प्राणी प्रारब्धके अधीन हैं। इसीसे वे सदा-सर्वदा एक साथ नहीं रह सकते॥ १८॥
मा शोचतं महाभागावात्मजान् स्वकृतम्भुजः।
जन्तवो न सदैकत्र दैवाधीनास्तदासते॥ १८
तुम दोनों महात्मा हो। अपने पुत्रोंके लिये शोक मत करो। उन्हें तो अपने कर्मका ही फल मिला है। सभी प्राणी प्रारब्धके अधीन हैं। इसीसे वे सदा-सर्वदा एक साथ नहीं रह सकते॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.4.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 147) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/4/18/