श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.4.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

किं मया हतया मन्द जातः खलु तवान्तकृत्।

यत्र क्व वा पूर्वशत्रुर्मा हिंसीः कृपणान् वृथा॥ १२

kiṃ mayā hatayā manda jātaḥ khalu tavāntakṛt|

yatra kva vā pūrvaśatrurmā hiṃsīḥ kṛpaṇān vṛthā|| 12

अर्थ

‘रे मूर्ख! मुझे मारनेसे तुझे क्या मिलेगा? तेरे पूर्वजन्मका शत्रु तुझे मारनेके लिये किसी स्थानपर पैदा हो चुका है। अब तू व्यर्थ निर्दोष बालकोंकी हत्या न किया कर’॥ १२॥

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