॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.4.11
सिद्धचारणगन्धर्वैरप्सरःकिन्नरोरगैः ।
उपाहृतोरुबलिभिः स्तूयमानेदमब्रवीत्॥ ११
siddhacāraṇagandharvairapsaraḥkinnaroragaiḥ |
upāhṛtorubalibhiḥ stūyamānedamabravīt|| 11
अर्थ
सिद्ध, चारण, गन्धर्व, अप्सरा, किन्नर और नागगण बहुत-सी भेंटकी सामग्री समर्पित करके उसकी स्तुति कर रहे थे । उस समय देवीने कंससे यह कहा—॥ ११॥