कंससे इस प्रकार कहकर भगवती योगमाया वहाँसे अन्तर्धान हो गयीं और पृथ्वीके अनेक स्थानोंमें विभिन्न नामोंसे प्रसिद्ध हुईं॥ १३॥
इति प्रभाष्य तं देवी माया भगवती भुवि।
बहुनामनिकेतेषु बहुनामा बभूव ह॥ १३
कंससे इस प्रकार कहकर भगवती योगमाया वहाँसे अन्तर्धान हो गयीं और पृथ्वीके अनेक स्थानोंमें विभिन्न नामोंसे प्रसिद्ध हुईं॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.4.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 146) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/4/13/