इधर भगवान् श्रीकृष्ण केशीको लड़ाईमें मारकर फिर अपने प्रेमी एवं प्रसन्नचित्त ग्वाल-बालोंके साथ पूर्ववत् पशु-पालनके काममें लग गये तथा व्रजवासियोंको परमानन्द वितरण करने लगे॥ २६॥
भगवानपि गोविन्दो हत्वा केशिनमाहवे।
पशूनपालयत् पालैः प्रीतैर्व्रजसुखावहः॥ २६
इधर भगवान् श्रीकृष्ण केशीको लड़ाईमें मारकर फिर अपने प्रेमी एवं प्रसन्नचित्त ग्वाल-बालोंके साथ पूर्ववत् पशु-पालनके काममें लग गये तथा व्रजवासियोंको परमानन्द वितरण करने लगे॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.37.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 365) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/37/26/