एक समय वे सब ग्वालबाल पहाड़की चोटियोंपर गाय आदि पशुओंको चरा रहे थे तथा कुछ चोर और कुछ रक्षक बनकर छिपने-छिपानेका—लुका-लुकीका खेल खेल रहे थे॥ २७॥
एकदा ते पशून् पालाश्चारयन्तोऽद्रिसानुषु।
चक्रुर्निलायनक्रीडाश्चोरपालापदेशतः ॥ २७
एक समय वे सब ग्वालबाल पहाड़की चोटियोंपर गाय आदि पशुओंको चरा रहे थे तथा कुछ चोर और कुछ रक्षक बनकर छिपने-छिपानेका—लुका-लुकीका खेल खेल रहे थे॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.37.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 365) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/37/27/