॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.32.2
तासामाविरभूच्छौरिः स्मयमानमुखाम्बुजः।
पीताम्बरधरः स्रग्वी साक्षान्मन्मथमन्मथः॥ २
tāsāmāvirabhūcchauriḥ smayamānamukhāmbujaḥ|
pītāmbaradharaḥ sragvī sākṣānmanmathamanmathaḥ|| 2
अर्थ
ठीक उसी समय उनके बीचोबीच भगवान् श्रीकृष्ण प्रकट हो गये। उनका मुखकमल मन्द-मन्द मुसकानसे खिला हुआ था। गलेमें वनमाला थी, पीताम्बर धारण किये हुए थे। उनका यह रूप क्या था, सबके मनको मथ डालनेवाले कामदेवके मनको भी मथनेवाला था॥ २॥