विश्वात्मन्! आपका यह रूप अलौकिक है। आप शंख, चक्र, गदा और कमलकी शोभासे युक्त अपना यह चतुर्भुजरूप छिपा लीजिये॥ ३०॥
उपसंहर विश्वात्मन्नदो रूपमलौकिकम्।
शंखचक्रगदापद्मश्रिया जुष्टं चतुर्भुजम्॥ ३०
विश्वात्मन्! आपका यह रूप अलौकिक है। आप शंख, चक्र, गदा और कमलकी शोभासे युक्त अपना यह चतुर्भुजरूप छिपा लीजिये॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.3.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 141) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/3/30/