मधुसूदन! इस पापी कंसको यह बात मालूम न हो कि आपका जन्म मेरे गर्भसे हुआ है। मेरा धैर्य टूट रहा है। आपके लिये मैं कंससे बहुत डर रही हूँ॥ २९॥
जन्म ते मय्यसौ पापो मा विद्यान्मधुसूदन।
समुद्विजे भवद्धेतोः कंसादहमधीरधीः॥ २९
मधुसूदन! इस पापी कंसको यह बात मालूम न हो कि आपका जन्म मेरे गर्भसे हुआ है। मेरा धैर्य टूट रहा है। आपके लिये मैं कंससे बहुत डर रही हूँ॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.3.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 141) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/3/29/