जिस जलाशयमें अक्रूरको भगवान्ने अपना स्वरूप दिखलाया था, उसी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मह्रदमें भगवान् उन गोपोंको ले गये। वहाँ उन लोगोंने उसमें डुबकी लगायी। वे ब्रह्मह्रदमें प्रवेश कर गये। तब भगवान्ने उसमेंसे उनको निकालकर अपने परमधामका दर्शन कराया॥ १६॥✎ 14281429
ते तु ब्रह्मह्रदं नीता मग्नाः कृष्णेन चोद्धृताः।
ददृशुर्ब्रह्मणो लोकं यत्राक्रूरोऽध्यगात् पुरा॥ १६
जिस जलाशयमें अक्रूरको भगवान्ने अपना स्वरूप दिखलाया था, उसी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मह्रदमें भगवान् उन गोपोंको ले गये। वहाँ उन लोगोंने उसमें डुबकी लगायी। वे ब्रह्मह्रदमें प्रवेश कर गये। तब भगवान्ने उसमेंसे उनको निकालकर अपने परमधामका दर्शन कराया॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.28.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 306) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/28/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#1154 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ब्रह्महृदं → ब्रह्मह्रदं
#1428 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ब्रह्महृदमें → ब्रह्मह्रदमें
#1429 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ब्रह्महृदमें → ब्रह्मह्रदमें