॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.28.15
सत्यं ज्ञानमनन्तं यद् ब्रह्म ज्योतिः सनातनम्।
यद्धि पश्यन्ति मुनयो गुणापाये समाहिताः॥ १५
satyaṃ jñānamanantaṃ yad brahma jyotiḥ sanātanam|
yaddhi paśyanti munayo guṇāpāye samāhitāḥ|| 15
अर्थ
भगवान्ने पहले उनको उस ब्रह्मका साक्षात्कार करवाया जिसका स्वरूप सत्य, ज्ञान, अनन्त, सनातन और ज्योतिःस्वरूप है तथा समाधिनिष्ठ गुणातीत पुरुष ही जिसे देख पाते हैं॥ १५॥