श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.26.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

इति नन्दवचः श्रुत्वा गर्गगीतं व्रजौकसः।

दृष्टश्रुतानुभावास्ते कृष्णस्यामिततेजसः।

मुदिता नन्दमानर्चुः कृष्णं च गतविस्मयाः॥ २४

iti nandavacaḥ śrutvā gargagītaṃ vrajaukasaḥ|

dṛṣṭaśrutānubhāvāste kṛṣṇasyāmitatejasaḥ|

muditā nandamānarcuḥ kṛṣṇaṃ ca gatavismayāḥ|| 24

अर्थ

जब व्रजवासियोंने नन्दबाबाके मुखसे गर्गजीकी यह बात सुनी, तब उनका विस्मय जाता रहा। क्योंकि अब वे अमिततेजस्वी श्रीकृष्णके प्रभावको पूर्णरूपसे देख और सुन चुके थे। आनन्दमें भरकर उन्होंने नन्दबाबा और श्रीकृष्णकी भूरि-भूरि प्रशंसा की॥ २४॥

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