श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.26.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

इत्यद्धा मां समादिश्य गर्गे च स्वगृहं गते।

मन्ये नारायणस्यांशं कृष्णमक्लिष्टकारिणम्॥ २३

ityaddhā māṃ samādiśya garge ca svagṛhaṃ gate|

manye nārāyaṇasyāṃśaṃ kṛṣṇamakliṣṭakāriṇam|| 23

अर्थ

गोपो! मुझे स्वयं गर्गाचार्यजी यह आदेश देकर अपने घर चले गये। तबसे मैं अलौकिक और परम सुखद कर्म करनेवाले इस बालकको भगवान् नारायणका ही अंश मानता हूँ॥ २३॥

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