॥ श्रीहरिः ॥
अहं चैरावतं नागमारुह्यानुव्रजे व्रजम्।
मरुद्गणैर्महा२वीर्यैर्नन्दगोष्ठजिघांसया ॥ ७
ahaṃ cairāvataṃ nāgamāruhyānuvraje vrajam|
marudgaṇairmahāvīryairnandagoṣṭhajighāṃsayā || 7
अर्थ
मैं भी तुम्हारे पीछे-पीछे ऐरावत हाथीपर चढ़कर नन्दके व्रजका नाश करनेके लिये महापराक्रमी मरुद्गणोंके साथ आता हूँ’॥ ७॥
अहं चैरावतं नागमारुह्यानुव्रजे व्रजम्।
मरुद्गणैर्महावीर्यैर्नन्दगोष्ठजिघांसया ॥ ७
मैं भी तुम्हारे पीछे-पीछे ऐरावत हाथीपर चढ़कर नन्दके व्रजका नाश करनेके लिये महापराक्रमी मरुद्गणोंके साथ आता हूँ’॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 294) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/25/7/टिप्पणियाँ
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हावेगैर्न०।
(मुद्रित पृष्ठ 294)