श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.25.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

एषां श्रियावलिप्तानां कृष्णेनाध्मायितात्मनाम्।

धुनुत श्रीमदस्तम्भं पशून् नयत संक्षयम्॥ ६

eṣāṃ śriyāvaliptānāṃ kṛṣṇenādhmāyitātmanām|

dhunuta śrīmadastambhaṃ paśūn nayata saṃkṣayam|| 6

अर्थ

एक तो ये यों ही धनके नशेमें चूर हो रहे थे; दूसरे कृष्णने इनको और बढ़ावा दे दिया है। अब तुमलोग जाकर इनके इस धनके घमण्ड और हेकड़ीको धूलमें मिला दो तथा उनके पशुओंका संहार कर डालो॥ ६॥

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