मायाका नाश करनेवाले प्रभो! दूरकी बात कौन करे—अभी इसी अवतारमें आपने इस बाहर दीखनेवाले जगत्को अपने पेटमें ही दिखला दिया, जिसे देखकर माता यशोदा चकित हो गयी थीं। इससे यही तो सिद्ध होता है कि यह सम्पूर्ण विश्व केवल आपकी माया-ही-माया है॥ १६॥✎ 1421
अत्रैव मायाधमनावतारे
ह्यस्य प्रपंचस्य बहिः स्फुटस्य।
कृत्स्नस्य चान्तर्जठरे जनन्या
मायात्वमेव प्रकटीकृतं ते॥ १६
मायाका नाश करनेवाले प्रभो! दूरकी बात कौन करे—अभी इसी अवतारमें आपने इस बाहर दीखनेवाले जगत्को अपने पेटमें ही दिखला दिया, जिसे देखकर माता यशोदा चकित हो गयी थीं। इससे यही तो सिद्ध होता है कि यह सम्पूर्ण विश्व केवल आपकी माया-ही-माया है॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.14.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 223) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/14/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1421 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छड़ी-छींके → छड़ी-छीके