श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

तथेति पाययित्वार्भा वत्सानारुध्य शाद्वले।

मुक्त्वा शिक्यानि बुभुजुः समं भगवता मुदा॥ ७

tatheti pāyayitvārbhā vatsānārudhya śādvale|

muktvā śikyāni bubhujuḥ samaṃ bhagavatā mudā|| 7

अर्थ

ग्वालबालोंने एक स्वरसे कहा—‘ठीक है, ठीक है!’ उन्होंने बछड़ोंको पानी पिलाकर हरी-हरी घासमें छोड़ दिया और अपने-अपने छीके खोल-खोलकर भगवान्‌के साथ बड़े आनन्दसे भोजन करने लगे॥ ७॥✎ 1417 1418 2067

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #1417 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींके, → छीके,
  • #1418 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींके → छीके
  • #2067 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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