अब हमलोगोंको यहाँ भोजन कर लेना चाहिये; क्योंकि दिन बहुत चढ़ आया है और हमलोग भूखसे पीड़ित हो रहे हैं। बछड़े पानी पीकर समीप ही धीरे-धीरे हरी-हरी घास चरते रहें’॥ ६॥✎ 2066
अत्र भोक्तव्यमस्माभिर्दिवारूढं क्षुधार्दिताः।
वत्साः समीपेऽपः पीत्वा चरन्तु शनकैस्तृणम्॥ ६
अब हमलोगोंको यहाँ भोजन कर लेना चाहिये; क्योंकि दिन बहुत चढ़ आया है और हमलोग भूखसे पीड़ित हो रहे हैं। बछड़े पानी पीकर समीप ही धीरे-धीरे हरी-हरी घास चरते रहें’॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 211) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/13/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)