परन्तु जब ग्वालबाल और बछड़े उन्हें कहीं न मिले, तब वे तुरंत जान गये कि यह सब ब्रह्माकी करतूत है। वे तो सारे विश्वके एकमात्र ज्ञाता हैं॥ १७॥✎ 14192069
क्वाप्यदृष्ट्वान्तर्विपिने वत्सान् पालांश्च विश्ववित्।
सर्वं विधिकृतं कृष्णः सहसावजगाम ह॥ १७
परन्तु जब ग्वालबाल और बछड़े उन्हें कहीं न मिले, तब वे तुरंत जान गये कि यह सब ब्रह्माकी करतूत है। वे तो सारे विश्वके एकमात्र ज्ञाता हैं॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 213) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/13/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)