भगवान् श्रीकृष्ण बछड़े न मिलनेपर यमुनाजीके पुलिनपर लौट आये, परन्तु यहाँ क्या देखते हैं कि ग्वालबाल भी नहीं हैं। तब उन्होंने वनमें घूम-घूमकर चारों ओर उन्हें ढूँढ़ा॥ १६॥✎ 14192069
ततो वत्सानदृष्ट्वैत्य पुलिनेऽपि च वत्सपान्।
उभावपि वने कृष्णो विचिकाय समन्ततः॥ १६
भगवान् श्रीकृष्ण बछड़े न मिलनेपर यमुनाजीके पुलिनपर लौट आये, परन्तु यहाँ क्या देखते हैं कि ग्वालबाल भी नहीं हैं। तब उन्होंने वनमें घूम-घूमकर चारों ओर उन्हें ढूँढ़ा॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 213) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/13/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)