श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

ततो वत्सानदृष्ट्वैत्य पुलिनेऽपि च वत्सपान्।

उभावपि वने कृष्णो विचिकाय समन्ततः॥ १६

tato vatsānadṛṣṭvaitya puline'pi ca vatsapān|

ubhāvapi vane kṛṣṇo vicikāya samantataḥ|| 16

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्ण बछड़े न मिलनेपर यमुनाजीके पुलिनपर लौट आये, परन्तु यहाँ क्या देखते हैं कि ग्वालबाल भी नहीं हैं। तब उन्होंने वनमें घूम-घूमकर चारों ओर उन्हें ढूँढ़ा॥ १६॥✎ 1419 2069

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1419 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींके → छीके
  • #2069 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें