कोई-कोई बंदरोंकी पूँछ पकड़कर खींच रहे हैं, तो दूसरे उनके साथ इस पेड़से उस पेड़पर चढ़ रहे हैं। कोई-कोई उनके साथ मुँह बना रहे हैं, तो दूसरे उनके साथ एक डालसे दूसरी डालपर छलाँग मार रहे हैं॥ ९॥✎ 14141415
विकर्षन्तः कीशवालानारोहन्तश्च तैर्द्रुमान्।
विकुर्वन्तश्च तैः साकं प्लवन्तश्च पलाशिषु॥ ९
कोई-कोई बंदरोंकी पूँछ पकड़कर खींच रहे हैं, तो दूसरे उनके साथ इस पेड़से उस पेड़पर चढ़ रहे हैं। कोई-कोई उनके साथ मुँह बना रहे हैं, तो दूसरे उनके साथ एक डालसे दूसरी डालपर छलाँग मार रहे हैं॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.12.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 204) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/12/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)