अघासुर बछड़ों और ग्वालबालोंके सहित भगवान् श्रीकृष्णको अपनी डाढ़ोंसे चबाकर चूर-चूर कर डालना चाहता था। परन्तु उसी समय अविनाशी श्रीकृष्णने देवताओंकी ‘हाय-हाय’ सुनकर उसके गलेमें अपने शरीरको बड़ी फुर्तीसे बढ़ा लिया॥ ३०॥✎ 1659
तच्छ्रुत्वा भगवान् कृष्णस्त्वव्ययः सार्भवत्सकम्।
चूर्णीचिकीर्षोरात्मानं तरसा ववृधे गले॥ ३०
अघासुर बछड़ों और ग्वालबालोंके सहित भगवान् श्रीकृष्णको अपनी डाढ़ोंसे चबाकर चूर-चूर कर डालना चाहता था। परन्तु उसी समय अविनाशी श्रीकृष्णने देवताओंकी ‘हाय-हाय’ सुनकर उसके गलेमें अपने शरीरको बड़ी फुर्तीसे बढ़ा लिया॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.12.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 207) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/12/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)