चौथेने कहा—‘अरे भाई! यह लम्बी-चौड़ी सड़क तो ठीक अजगरकी जीभ-सरीखी मालूम पड़ती है और इन गिरिशृंगोंके बीचका अन्धकार तो उसके मुँहके भीतरी भागको भी मात करता है’॥ २२॥
आस्तृतायाममार्गोऽयं रसनां प्रतिगर्जति।
एषामन्तर्गतं ध्वान्तमेतदप्यन्तराननम्॥ २२
चौथेने कहा—‘अरे भाई! यह लम्बी-चौड़ी सड़क तो ठीक अजगरकी जीभ-सरीखी मालूम पड़ती है और इन गिरिशृंगोंके बीचका अन्धकार तो उसके मुँहके भीतरी भागको भी मात करता है’॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.12.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 206) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/12/22/