श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.10.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

एवं साधारणं देहमव्यक्तप्रभवाप्ययम्।

को विद्वानात्मसात् कृत्वा हन्ति जन्तूनृतेऽसतः॥ १२

evaṃ sādhāraṇaṃ dehamavyaktaprabhavāpyayam|

ko vidvānātmasāt kṛtvā hanti jantūnṛte'sataḥ|| 12

अर्थ

यह शरीर एक साधारण-सी वस्तु है। प्रकृतिसे पैदा होता है और उसीमें समा जाता है। ऐसी स्थितिमें मूर्ख पशुओंके सिवा और ऐसा कौन बुद्धिमान् है जो इसको अपना आत्मा मानकर दूसरोंको कष्ट पहुँचायेगा, उनके प्राण लेगा॥ १२॥

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