श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.34

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

भारावतारणायान्ये भुवो नाव इवोदधौ।

सीदन्त्या भूरिभारेण जातो ह्यात्मभुवार्थितः॥ ३४

bhārāvatāraṇāyānye bhuvo nāva ivodadhau|

sīdantyā bhūribhāreṇa jāto hyātmabhuvārthitaḥ|| 34

अर्थ

कुछ और लोग यों कहते हैं कि यह पृथ्वी दैत्योंके अत्यन्त भारसे समुद्रमें डूबते हुए जहाजकी तरह डगमगा रही थी—पीड़ित हो रही थी, तब ब्रह्माकी प्रार्थनासे उसका भार उतारनेके लिये ही आप प्रकट हुए॥ ३४॥

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