श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.10

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

अभिद्रवति मामीश शरस्तप्तायसो विभो।

कामं दहतु२ मां नाथ मा मे गर्भो निपात्यताम्॥ १०

abhidravati māmīśa śarastaptāyaso vibho|

kāmaṃ dahatu māṃ nātha mā me garbho nipātyatām|| 10

अर्थ

प्रभो! आप सर्वशक्तिमान् हैं। यह दहकते हुए लोहेका बाण मेरी ओर दौड़ा आ रहा है। स्वामिन्! यह मुझे भले ही जला डाले, परन्तु मेरे गर्भको नष्ट न करे—ऐसी कृपा कीजिये॥ १०॥✎ 1914

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—दहति।

    (मुद्रित पृष्ठ 114)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1914 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सर्व-शक्तिमान् → सर्वशक्तिमान्

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