kāmaṃ dahatu māṃ nātha mā me garbho nipātyatām|| 10
अर्थ
प्रभो! आप सर्वशक्तिमान् हैं। यह दहकते हुए लोहेका बाण मेरी ओर दौड़ा आ रहा है। स्वामिन्! यह मुझे भले ही जला डाले, परन्तु मेरे गर्भको नष्ट न करे—ऐसी कृपा कीजिये॥ १०॥✎ 1914
अभिद्रवति मामीश शरस्तप्तायसो विभो।
कामं दहतु मां नाथ मा मे गर्भो निपात्यताम्॥ १०
प्रभो! आप सर्वशक्तिमान् हैं। यह दहकते हुए लोहेका बाण मेरी ओर दौड़ा आ रहा है। स्वामिन्! यह मुझे भले ही जला डाले, परन्तु मेरे गर्भको नष्ट न करे—ऐसी कृपा कीजिये॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.8.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 114) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/8/10/
टिप्पणियाँ
२
प्रा० पा०—दहति।
(मुद्रित पृष्ठ 114)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1914 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सर्व-शक्तिमान् → सर्वशक्तिमान्