तुमने द्रौपदीको सान्त्वना देते समय जो प्रतिज्ञा की थी उसे भी सत्य करो; साथ ही भीमसेन, द्रौपदी और मुझे जो प्रिय हो, वह भी करो॥ ५४॥
कुरु प्रतिश्रुतं सत्यं यत्तत्सान्त्वयता प्रियाम्।
प्रियं च भीमसेनस्य पाञ्चाल्या मह्यमेव च॥ ५४
तुमने द्रौपदीको सान्त्वना देते समय जो प्रतिज्ञा की थी उसे भी सत्य करो; साथ ही भीमसेन, द्रौपदी और मुझे जो प्रिय हो, वह भी करो॥ ५४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.54 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 112) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/7/54/