भगवान् श्रीकृष्ण बोले—‘पतित ब्राह्मणका भी वध नहीं करना चाहिये और आततायीको मार ही डालना चाहिये’—शास्त्रोंमें मैंने ही ये दोनों बातें कही हैं। इसलिये मेरी दोनों आज्ञाओंका पालन करो॥ ५३॥
ब्रह्मबन्धुर्न हन्तव्य आततायी वधार्हणः।
मयैवोभयमाम्नातं परिपाह्यनुशासनम्॥ ५३
भगवान् श्रीकृष्ण बोले—‘पतित ब्राह्मणका भी वध नहीं करना चाहिये और आततायीको मार ही डालना चाहिये’—शास्त्रोंमें मैंने ही ये दोनों बातें कही हैं। इसलिये मेरी दोनों आज्ञाओंका पालन करो॥ ५३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.53 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 112) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/7/53/