देवर्षे! काल तो सभी वस्तुओंको नष्ट कर देता है, उसने आपकी इस पूर्वकल्पकी स्मृतिका कैसे नाश नहीं किया?॥ ४॥
प्राक्कल्पविषयामेतां स्मृतिं ते सुरसत्तम।
न ह्येष व्यवधात्काल एष सर्वनिराकृतिः॥ ४
देवर्षे! काल तो सभी वस्तुओंको नष्ट कर देता है, उसने आपकी इस पूर्वकल्पकी स्मृतिका कैसे नाश नहीं किया?॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.6.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 102) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/6/4/