श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.6.5

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

नारद उवाच

भिक्षुभिर्विप्रवसिते विज्ञानादेष्टृभिर्मम।

वर्तमानो वयस्याद्ये तत एतदकारषम्॥ ५

bhikṣubhirvipravasite vijñānādeṣṭṛbhirmama|

vartamāno vayasyādye tata etadakāraṣam|| 5

अर्थ

श्रीनारदजीने कहा—मुझे ज्ञानोपदेश करनेवाले महात्मागण जब चले गये, तब मैंने इस प्रकार अपना जीवन व्यतीत किया—यद्यपि उस समय मेरी अवस्था बहुत छोटी थी॥ ५॥

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