श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.6.29

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

प्रयुज्यमाने मयि तां शुद्धां भागवतीं तनुम्।

आरब्धकर्मनिर्वाणो न्यपतत् पाञ्चभौतिकः॥ २९

prayujyamāne mayi tāṃ śuddhāṃ bhāgavatīṃ tanum|

ārabdhakarmanirvāṇo nyapatat pāñcabhautikaḥ|| 29

अर्थ

मुझे शुद्ध भगवत्पार्षद-शरीर प्राप्त होनेका अवसर आनेपर प्रारब्धकर्म समाप्त हो जानेके कारण पांचभौतिक शरीर नष्ट हो गया॥ २९॥✎ 58 59 60 61 1280 1281

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (6)
  • #58 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #59 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #60 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #61 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #1280 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: (प्रलय-कालीन → (प्रलयकालीन
  • #1281 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पांच-भौतिक → पांचभौतिक

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