व्यासजी! इस प्रकार भगवान्की कृपासे मेरा हृदय शुद्ध हो गया, आसक्ति मिट गयी और मैं श्रीकृष्णपरायण हो गया। कुछ समय बाद, जैसे एकाएक बिजली कौंध जाती है, वैसे ही अपने समयपर मेरी मृत्यु आ गयी॥ २८॥✎ 5859606112801281
एवं कृष्णमतेर्ब्रह्मन्नसक्तस्यामलात्मनः।
कालः प्रादुरभूत्काले तडित्सौदामनी यथा॥ २८
व्यासजी! इस प्रकार भगवान्की कृपासे मेरा हृदय शुद्ध हो गया, आसक्ति मिट गयी और मैं श्रीकृष्णपरायण हो गया। कुछ समय बाद, जैसे एकाएक बिजली कौंध जाती है, वैसे ही अपने समयपर मेरी मृत्यु आ गयी॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.6.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 105) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/6/28/