श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.4.8

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

स गोदोहनमात्रं हि गृहेषु गृहमेधिनाम्।

अवेक्षते महाभागस्तीर्थीकुर्वंस्तदाश्रमम्॥ ८

sa godohanamātraṃ hi gṛheṣu gṛhamedhinām|

avekṣate mahābhāgastīrthīkurvaṃstadāśramam|| 8

अर्थ

महाभाग श्रीशुकदेवजी तो गृहस्थोंके घरोंको तीर्थस्वरूप बना देनेके लिये उतनी ही देर उनके दरवाजेपर रहते हैं, जितनी देरमें एक गाय दुही जाती है॥ ८॥✎ 1278 1279

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1278 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पाण्डव-नन्दन → पाण्डवनन्दन
  • #1279 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नगर-वासियोंने → नगरवासियोंने

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