महाभाग श्रीशुकदेवजी तो गृहस्थोंके घरोंको तीर्थस्वरूप बना देनेके लिये उतनी ही देर उनके दरवाजेपर रहते हैं, जितनी देरमें एक गाय दुही जाती है॥ ८॥✎ 12781279
स गोदोहनमात्रं हि गृहेषु गृहमेधिनाम्।
अवेक्षते महाभागस्तीर्थीकुर्वंस्तदाश्रमम्॥ ८
महाभाग श्रीशुकदेवजी तो गृहस्थोंके घरोंको तीर्थस्वरूप बना देनेके लिये उतनी ही देर उनके दरवाजेपर रहते हैं, जितनी देरमें एक गाय दुही जाती है॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.4.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 94) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/4/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1278 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पाण्डव-नन्दन → पाण्डवनन्दन
#1279 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नगर-वासियोंने → नगरवासियोंने