श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.4.7

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

कथं वा पाण्डवेयस्य राजर्षेर्मुनिना सह।

संवादः समभूत्तात यत्रैषा सात्वती श्रुतिः॥ ७

kathaṃ vā pāṇḍaveyasya rājarṣermuninā saha|

saṃvādaḥ samabhūttāta yatraiṣā sātvatī śrutiḥ|| 7

अर्थ

पाण्डवनन्दन राजर्षि परीक्षित‍्का इन मौनी शुकदेवजीके साथ संवाद कैसे हुआ, जिसमें यह भागवतसंहिता कही गयी?॥ ७॥✎ 1278 1279

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1278 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पाण्डव-नन्दन → पाण्डवनन्दन
  • #1279 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नगर-वासियोंने → नगरवासियोंने

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