श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.4.3

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

कस्मिन् युगे प्रवृत्तेयं स्थाने वा केन हेतुना।

कुतः सञ्चोदितः कृष्णः कृतवान् संहितां मुनिः॥ ३

kasmin yuge pravṛtteyaṃ sthāne vā kena hetunā|

kutaḥ sañcoditaḥ kṛṣṇaḥ kṛtavān saṃhitāṃ muniḥ|| 3

अर्थ

वह कथा किस युगमें, किस स्थानपर और किस कारणसे हुई थी? मुनिवर श्रीकृष्णद्वैपायनने किसकी प्रेरणासे इस परमहंसोंकी संहिताका निर्माण किया था?॥ ३॥✎ 1278 1279

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1278 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पाण्डव-नन्दन → पाण्डवनन्दन
  • #1279 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नगर-वासियोंने → नगरवासियोंने

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