शौनकजी बोले—सूतजी! आप वक्ताओंमें श्रेष्ठ हैं तथा बड़े भाग्यशाली हैं, जो कथा भगवान् श्रीशुकदेवजीने कही थी, वही भगवान्की पुण्यमयी कथा कृपा करके आप हमें सुनाइये॥ २॥✎ 35
सूत सूत महाभाग वद नो वदतां वर।
कथां भागवतीं पुण्यां यदाह भगवाञ्छुकः॥ २
शौनकजी बोले—सूतजी! आप वक्ताओंमें श्रेष्ठ हैं तथा बड़े भाग्यशाली हैं, जो कथा भगवान् श्रीशुकदेवजीने कही थी, वही भगवान्की पुण्यमयी कथा कृपा करके आप हमें सुनाइये॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.4.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 94) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/4/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)