श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.2.24

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

पार्थिवाद्दारुणो धूमस्तस्मादग्‍निस्त्रयीमयः।

तमसस्तु रजस्तस्मात्सत्त्वं यद्ब्रह्मदर्शनम्॥ २४

pārthivāddāruṇo dhūmastasmādagnistrayīmayaḥ|

tamasastu rajastasmātsattvaṃ yadbrahmadarśanam|| 24

अर्थ

जैसे पृथ्वीके विकार लकड़ीकी अपेक्षा धुआँ श्रेष्ठ है और उससे भी श्रेष्ठ है अग्‍नि—क्योंकि वेदोक्त यज्ञ-यागादिके द्वारा अग्‍नि सद्गति देनेवाला है—वैसे ही तमोगुणसे रजोगुण श्रेष्ठ है और रजोगुणसे भी सत्त्वगुण श्रेष्ठ है; क्योंकि वह भगवान्‌का दर्शन करानेवाला है॥ २४॥

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