॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.19.16
पुनश्च भूयाद्भगवत्यनन्ते
रतिः प्रसङ्गश्च तदाश्रयेषु।
महत्सु यां यामुपयामि सृष्टिं
मैत्र्यस्तु सर्वत्र नमो द्विजेभ्यः॥ १६
punaśca bhūyādbhagavatyanante
ratiḥ prasaṅgaśca tadāśrayeṣu|
mahatsu yāṃ yāmupayāmi sṛṣṭiṃ
maitryastu sarvatra namo dvijebhyaḥ|| 16
अर्थ
मैं आप ब्राह्मणोंके चरणोंमें प्रणाम करके पुनः यही प्रार्थना करता हूँ कि मुझे कर्मवश चाहे जिस योनिमें जन्म लेना पड़े, भगवान् श्रीकृष्णके चरणोंमें मेरा अनुराग हो, उनके चरणाश्रित महात्माओंसे विशेष प्रीति हो और जगत्के समस्त प्राणियोंके प्रति मेरी एक-सी मैत्री रहे। ऐसा आप आशीर्वाद दीजिये॥ १६॥✎ 113