श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.18.4

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

नोत्तमश्लोकवार्तानां जुषतां तत्कथामृतम्।

स्यात्सम्भ्रमोऽन्तकालेऽपि स्मरतां तत्पदाम्बुजम्॥ ४

nottamaślokavārtānāṃ juṣatāṃ tatkathāmṛtam|

syātsambhramo'ntakāle'pi smaratāṃ tatpadāmbujam|| 4

अर्थ

जो लोग भगवान् श्रीकृष्णकी लीलाकथा कहते रहते हैं, उस कथामृतका पान करते रहते हैं और इन दोनों ही साधनोंके द्वारा उनके चरण-कमलोंका स्मरण करते रहते हैं, उन्हें अन्तकालमें भी मोह नहीं होता॥ ४॥✎ 109

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #109 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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