धेनुपुत्र! अब आप शोक न करें। इस शूद्रसे निर्भय हो जायँ। गोमाता! मैं दुष्टोंको दण्ड देनेवाला हूँ। अब आप रोयें नहीं। आपका कल्याण हो॥ ९॥
मा सौरभेयानुशुचो व्येतु ते वृषलाद् भयम्।
मा रोदीरम्ब भद्रं ते खलानां मयि शास्तरि॥ ९
धेनुपुत्र! अब आप शोक न करें। इस शूद्रसे निर्भय हो जायँ। गोमाता! मैं दुष्टोंको दण्ड देनेवाला हूँ। अब आप रोयें नहीं। आपका कल्याण हो॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.17.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 164) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/17/9/