श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.17.8

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

न जातु पौरवेन्द्राणां दोर्दण्डपरिरम्भिते।

भूतलेऽनुपतन्त्यस्मिन् विना ते प्राणिनां शुचः॥ ८

na jātu pauravendrāṇāṃ dordaṇḍaparirambhite|

bhūtale'nupatantyasmin vinā te prāṇināṃ śucaḥ|| 8

अर्थ

अभी यह भूमण्डल कुरुवंशी नरपतियोंके बाहुबलसे सुरक्षित है। इसमें आपके सिवा और किसी भी प्राणीकी आँखोंसे शोकके आँसू बहते मैंने नहीं देखे॥ ८॥

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