श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.17.12

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

कोऽवृश्‍चत् तव पादांस्त्रीन् सौरभेय चतुष्पद३।

मा भूवंस्त्वादृशा राष्ट्रे राज्ञां कृष्णानुवर्तिनाम्॥ १२

ko'vṛścat tava pādāṃstrīn saurabheya catuṣpada|

mā bhūvaṃstvādṛśā rāṣṭre rājñāṃ kṛṣṇānuvartinām|| 12

अर्थ

सुरभिनन्दन! आप तो चार पैरवाले जीव हैं। आपके तीन पैर किसने काट डाले? श्रीकृष्णके अनुयायी राजाओंके राज्यमें कभी कोई भी आपकी तरह दुःखी न हो॥ १२॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा० चतुष्पदः।

    (मुद्रित पृष्ठ 164)

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