श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.16.7

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

क्षुद्रायुषां नृणामङ्ग मर्त्यानामृतमिच्छताम्।

इहोपहूतो भगवान् मृत्युः शामित्रकर्मणि॥ ७

kṣudrāyuṣāṃ nṛṇāmaṅga martyānāmṛtamicchatām|

ihopahūto bhagavān mṛtyuḥ śāmitrakarmaṇi|| 7

अर्थ

प्यारे सूतजी! जो लोग चाहते तो हैं मोक्ष परन्तु अल्पायु होनेके कारण मृत्युसे ग्रस्त हो रहे हैं, उनके कल्याणके लिये भगवान् यमका आवाहन करके उन्हें यहाँ शामित्रकर्ममें नियुक्त कर दिया गया है॥ ७॥✎ 105

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #105 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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