उन्हें उन देशोंमें सर्वत्र अपने पूर्वज महात्माओंका सुयश सुननेको मिला। उस यशोगानसे पद-पदपर भगवान् श्रीकृष्णकी महिमा प्रकट होती थी॥ १३॥
तत्र तत्रोपशृण्वानः स्वपूर्वेषां महात्मनाम्।
प्रगीयमाणं च यशः कृष्णमाहात्म्यसूचकम्॥ १३
उन्हें उन देशोंमें सर्वत्र अपने पूर्वज महात्माओंका सुयश सुननेको मिला। उस यशोगानसे पद-पदपर भगवान् श्रीकृष्णकी महिमा प्रकट होती थी॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.16.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 159) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/16/13/