श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.16.12

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

भद्राश्‍वं केतुमालं च भारतं चोत्तरान् कुरून्।

किम्पुरुषादीनि वर्षाणि विजित्य जगृहे बलिम्॥ १२

bhadrāśvaṃ ketumālaṃ ca bhārataṃ cottarān kurūn|

kimpuruṣādīni varṣāṇi vijitya jagṛhe balim|| 12

अर्थ

उन्होंने भद्राश्‍व, केतुमाल, भारत, उत्तरकुरु और किम्पुरुष आदि सभी वर्षोंको जीतकर वहाँके राजाओंसे भेंट ली॥ १२॥

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